बुधवार, 9 सितंबर 2026

लखनऊ : कागजों में बनी सड़क, जमीन पर गायब! 21 दिन से किसानों का धरना, आखिर भ्रष्टाचार पर पर्दा क्यो?||||Lucknow: A road built on paper, missing on the ground! Farmers have been protesting for 21 days. Why is corruption being covered up?

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लखनऊ : 
कागजों में बनी सड़क, जमीन पर गायब! 21 दिन से किसानों का धरना,आखिर भ्रष्टाचार पर पर्दा क्यो?||
दो टूक : राजधानी के  ग्रामीण क्षेत्र में 700 मीटर सड़क के डामरीकरण पर बड़ा सवाल—2018 में भुगतान के बावजूद मौके पर नहीं मिला निर्माण, SDM का पहुंचना भी बेनतीजा।
विस्तार :
राजधानी लखनऊ के ग्रामीण क्षेत्र नगराम क्षेत्र में कुबहरा-कमालपुर-बिचलिका गांवों को जोड़ने वाले करीब 700 मीटर कच्चे मार्ग के डामरीकरण की मांग को लेकर राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन और ग्रामीणों का धरना लगातार 21वें दिन भी जारी रहा। किसानों का आरोप है कि सड़क के डामरीकरण का काम वर्ष 2018 में कागजों में पूरा दिखाकर करीब 1.85 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया, लेकिन धरातल पर सड़क आज भी कच्ची है।
मंगलवार को एसडीएम मोहनलालगंज आकाश सिंह और नगराम थाना प्रभारी अंजनी कुमार सिंह धरना स्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के प्रदेश महामंत्री दिनेश यादव समेत किसान नेताओं और ग्रामीणों से वार्ता कर धरना समाप्त कराने का प्रयास किया।
किसानों ने अधिकारियों के सामने सवाल उठाया कि जब सड़क का निर्माण वर्ष 2018 में पूरा दिखाया गया और भुगतान भी हो गया, तो मौके पर डामर कहां है? किसानों की शिकायत सुनने के बाद एसडीएम खुद पैदल सड़क का निरीक्षण करने पहुंचे। मौके पर निरीक्षण के दौरान डामरीकरण का कोई निर्माण नहीं मिला।
मौके की स्थिति देखने के बाद एसडीएम ने किसानों को भरोसा दिलाया कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी से वार्ता कर लोक निर्माण विभाग, वन विभाग, जिला पंचायत और किसानों के प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक कराई जाएगी और सड़क निर्माण की समस्या का समाधान कराया जाएगा। इसके लिए उन्होंने दो-तीन दिन का समय मांगा।
●आश्वासन से नहीं माने किसान, घेराव पर अड़े।
एसडीएम के आश्वासन के बावजूद किसान नेताओं ने धरना खत्म करने से साफ इनकार कर दिया। संगठन ने दो टूक कहा कि नौ सितंबर को लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता कार्यालय के प्रस्तावित घेराव को स्थगित नहीं किया जाएगा।
किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि बुधवार सुबह 10 बजे तक जिलाधिकारी के समक्ष सभी संबंधित विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों की बैठक नहीं कराई गई, तो कुबहरा धरना स्थल पर किसान बड़ी संख्या में एकत्र होंगे और लखनऊ स्थित लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता कार्यालय का घेराव करने के लिए कूच करेंगे।
अब सवाल सिर्फ 700 मीटर सड़क का नहीं, बल्कि उस रकम और जिम्मेदारी का है, जिसके खर्च होने के बावजूद सड़क जमीन पर नजर नहीं आ रही। किसानों के तेवर से साफ है कि जांच और कार्रवाई के ठोस कदम के बिना आंदोलन थमने वाला नहीं है।