लखनऊ :
शहर में छिपे थे इनामी चिटफंड के आरोपी दो भाई,STF ने दबोचा।
बदायूं में हजारों लोगों का पैसा फंसाने का आरोप, मुकदमों की लंबी फेहरिस्त।
दो टूक : बदायूं में चिटफंड और कथित निवेश के नाम पर लोगों से रकम जुटाकर फरार चल रहे 50-50 हजार रुपये के दो इनामी सगे भाइयों को उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने कृष्णा नगर क्षेत्र मानस नगर लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया। बदायूं मे दर्ज मुकदमे में फरार चल रहे थे।
◆विस्तार :
एसटीएफ के मुताबिक उत्तर प्रदेश के जनपद बदायूं मे दर्ज मुकदमे मे नामजद दो सगे भाई शशिकांत मौर्य और सूर्यकांत मौर्य आरोपी लंबे समय से गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहे थे। करीब आठ महीने तक उत्तम नगर, दिल्ली में छिपने के बाद दोनों लखनऊ के कृष्णानगर क्षेत्र मानस नगर इलाके में ठिकाना बनाकर रह रहे थे। मुखबिर से मिली सूचना के बाद एसटीएफ टीम ने घेराबंदी कर दोनों को बीते सोमवार की शाम करीब 5:40 बजे गिरफ्तार कर लिया।
चिटफंड कंपनियां खोलकर जुटाया पैसा, फिर फरार होने का आरोप।
पूछताछ में सामने आया कि शशिकांत मौर्य ने पहले किराने की दुकान चलाने के बाद फाइनेंस क्षेत्र में काम किया और बाद में ‘अमर ज्योति हायर परचेज’ नाम से निजी कंपनी शुरू की। इसके बाद वर्ष 2016 में ‘अमर ज्योति यूनिवर्स निधि लिमिटेड’ कंपनी बनाई गई। एसटीएफ के अनुसार इन कंपनियों के जरिए आम लोगों से निवेश और जमा के नाम पर रकम जुटाई जाती थी तथा कम समय में पैसा दोगुना करने का लालच भी दिया जाता था।
एसटीएफ का दावा है कि हजारों लोगों से पैसा निवेश कराने के बाद रकम समय पर वापस नहीं की गई और दोनों आरोपी बरेली छोड़कर फरार हो गए। मामले में बदायूं और बरेली के विभिन्न थानों में कई मुकदमे दर्ज हैं।
कई मुकदमों में वांछित, 50-50 हजार का था इनाम।
दोनों भाइयों के खिलाफ बदायूं के कोतवाली थाने में वर्ष 2025 और 2026 के कई मुकदमे दर्ज हैं। इसके अलावा बरेली के बारादरी थाने में भी धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में मुकदमे दर्ज बताए गए हैं। फरारी के चलते दोनों पर परिक्षेत्र स्तर से 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
एसटीएफ ने दोनों को बदायूं कोतवाली के मु.अ.सं. 167/2026, धारा 420, 406, 467, 468, 471 IPC में दाखिल किया है। आगे की वैधानिक कार्रवाई स्थानीय पुलिस द्वारा की जा रही है।
एसटीएफ अब दोनों आरोपियों की अन्य गतिविधियों और कथित निवेश नेटवर्क से जुड़े लोगों के संबंध में भी जानकारी जुटा रही है।
