लखनऊ :
बस अड्डे के वॉटर कूलर बना मौत का जाल,करंट से व्यक्ति की दर्दनाक मौत, गया था एक घूंट पानी पीने।।
।।ए के चतुर्वेदी।।
दो टूक : अम्बेडकरनगर जनपद के टांडा बस अड्डे पर सोमवार को एक दर्दनाक हादसे ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। बस अड्डे पर लगे सार्वजनिक वॉटर कूलर से पानी पीने पहुंचे एक व्यक्ति की कथित रूप से करंट की चपेट में आने से मौत हो गई। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई, जबकि स्थानीय लोगों और यात्रियों में भारी आक्रोश देखने को मिला। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और मामले की जांच शुरू कर दी है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, व्यक्ति जैसे ही वॉटर कूलर से पानी पीने पहुंचा, वह अचानक करंट की चपेट में आ गया और मौके पर ही बेहोश होकर गिर पड़ा। आसपास मौजूद लोगों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक उसकी हालत गंभीर हो चुकी थी। अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना के बाद बस अड्डे पर मौजूद लोगों ने नगर पालिका की लापरवाही पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस स्थान पर प्रतिदिन हजारों यात्रियों का आना-जाना रहता है और आसपास विद्यालय भी हैं, वहां लगे सार्वजनिक वॉटर कूलर की नियमित जांच और रखरखाव होना चाहिए था। लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते विद्युत सुरक्षा की जांच कराई गई होती, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि वॉटर कूलर में करंट आने की वास्तविक वजह की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी या संबंधित एजेंसी की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही जिले के सभी सार्वजनिक वॉटर कूलरों, वाटर एटीएम और अन्य विद्युत उपकरणों का तत्काल सुरक्षा ऑडिट कराने की भी मांग उठ रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। यह स्पष्ट होना अभी बाकी है कि व्यक्ति की मौत वास्तव में वॉटर कूलर में उतरे करंट से हुई या इसके पीछे कोई अन्य कारण था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और तकनीकी जांच के बाद ही घटना की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि जांच में वॉटर कूलर में विद्युत प्रवाह की पुष्टि होती है, तो इस दर्दनाक हादसे की जिम्मेदारी किसकी तय होगी? क्या सार्वजनिक सुविधाओं के रखरखाव में लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई होगी या मामला जांच तक ही सीमित रह जाएगा? पूरे क्षेत्र की निगाहें अब प्रशासन की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।
