सोमवार, 31 अगस्त 2026

गौतमबुद्धनगर: साइबर अपराधियों से दो कदम आगे रहने की तैयारी, गौतमबुद्धनगर पुलिस ने की तकनीकी दक्षता मजबूत!!

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गौतमबुद्धनगर: साइबर अपराधियों से दो कदम आगे रहने की तैयारी, गौतमबुद्धनगर पुलिस ने की तकनीकी दक्षता मजबूत!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

साइबर विशेषज्ञ डॉ. रक्षित टंडन ने पुलिसकर्मियों को दिया प्रशिक्षण, क्रिप्टोकरेंसी, ब्लॉकचेन, CDR-IPDR और डिजिटल साक्ष्यों की वैज्ञानिक विवेचना पर हुई विस्तृत चर्चा

दो टूक//ग्रेटर नोएडा। साइबर अपराध के लगातार बदलते स्वरूप और अपराधियों द्वारा अपनाई जा रही आधुनिक तकनीकों को देखते हुए गौतमबुद्धनगर पुलिस ने अपने पुलिसकर्मियों की तकनीकी क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पुलिस कमिश्नर गौतमबुद्धनगर श्रीमती लक्ष्मी सिंह के निर्देशन में सोमवार को पुलिस कमिश्नरेट में एक दिवसीय साइबर जागरूकता एवं क्षमता संवर्धन (Capacity Building) कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को साइबर अपराधों की रोकथाम, त्वरित कार्रवाई तथा तकनीकी और वैज्ञानिक तरीके से विवेचना के लिए और अधिक दक्ष बनाना रहा।

कार्यशाला का आयोजन सहायक पुलिस आयुक्त, साइबर श्री विवेक रंजन राय के नेतृत्व में किया गया। इसमें थाना साइबर क्राइम, जोनल साइबर सेल, आईटी सेल के पुलिसकर्मियों के साथ-साथ कमिश्नरेट में तैनात वर्ष 2023 बैच के सभी उपनिरीक्षकों और विभिन्न थानों पर स्थापित साइबर हेल्पडेस्क पर नियुक्त पुलिसकर्मियों ने हिस्सा लिया।

साइबर अपराध की जांच में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर

कार्यशाला में साइबर क्राइम मुख्यालय, उत्तर प्रदेश द्वारा अनुबंधित प्रख्यात साइबर विशेषज्ञ डॉ. रक्षित टंडन ने पुलिसकर्मियों को साइबर अपराधों की जांच और विवेचना से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की विस्तार से जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि साइबर अपराध की शिकायत मिलने के बाद डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने, उनका वैज्ञानिक तरीके से विश्लेषण करने और उपलब्ध तकनीकी संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल करने में किसी प्रकार की लापरवाही न हो।

पुलिसकर्मियों को साइबर अपराध की जांच में उपयोगी आधुनिक तकनीकी उपकरणों और डिजिटल संसाधनों के प्रयोग के संबंध में व्यवहारिक जानकारी भी दी गई। इसके साथ ही क्रिप्टोकरेंसी, ब्लॉकचेन तकनीक, CDR (Call Detail Record), IPDR (Internet Protocol Detail Record) सहित विभिन्न तकनीकी विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

डिजिटल साक्ष्यों के संरक्षण से न्यायालय में प्रभावी प्रस्तुतीकरण तक प्रशिक्षण

प्रशिक्षण के दौरान पुलिसकर्मियों को साइबर अपराधियों की बदलती कार्यप्रणाली और अपराध के नए तरीकों की पहचान करने के साथ-साथ डिजिटल एवं तकनीकी साक्ष्यों के सुरक्षित संकलन, संरक्षण और विश्लेषण की प्रक्रिया समझाई गई। साथ ही इस बात पर भी जोर दिया गया कि जांच के दौरान एकत्र किए गए डिजिटल साक्ष्यों को इस प्रकार सुरक्षित और व्यवस्थित रखा जाए, जिससे आवश्यकता पड़ने पर उन्हें न्यायालय के समक्ष प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया जा सके।

कार्यशाला में साइबर अपराधों से जुड़ी शिकायतों के त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए तकनीकी दक्षता विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया गया। पुलिसकर्मियों को बताया गया कि साइबर अपराधों की जांच में पारंपरिक पुलिसिंग के साथ-साथ तकनीकी एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण का इस्तेमाल बेहद आवश्यक है।

बदलते साइबर अपराधों से निपटने के लिए पुलिस को लगातार किया जा रहा अपडेट

गौतमबुद्धनगर में तेजी से बढ़ते डिजिटल लेन-देन और तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराध भी लगातार नए रूप में सामने आ रहे हैं। ऐसे में पुलिस के सामने चुनौती केवल अपराधियों को पकड़ने की नहीं, बल्कि उनके द्वारा इस्तेमाल की जा रही तकनीक और डिजिटल नेटवर्क को समझकर साक्ष्यों के आधार पर प्रभावी कार्रवाई करने की भी है।

इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर की ओर से पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को लगातार आधुनिक तकनीकों से अपडेट किया जा रहा है। कार्यशाला के माध्यम से पुलिसकर्मियों को साइबर अपराधों की बदलती चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने और शिकायतों का त्वरित, गुणवत्तापूर्ण एवं परिणामोन्मुख निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक तकनीकी कौशल विकसित करने पर बल दिया गया।

पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर का कहना है कि साइबर अपराधों की रोकथाम और उनके विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई के लिए पुलिस बल की तकनीकी क्षमता एवं व्यावसायिक दक्षता को लगातार मजबूत किया जा रहा है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए पुलिसकर्मियों को नई तकनीकों और साइबर अपराध के बदलते तरीकों की जानकारी देकर उन्हें जांच के लिए अधिक सक्षम बनाया जा रहा है, ताकि साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई के साथ वैज्ञानिक, निष्पक्ष और प्रभावी विवेचना सुनिश्चित की जा सके।।