मऊ :
जनपद के विकास में युवाओं की भूमिका पर उठे सवाल ?||
चाटुकारिता छोड़ विकास की मुख्य धारा की जरूरत।
।।देवेन्द्र कुशवाहा।।
दो टूक : मऊ जनपद के विकास और युवाओं की राजनीतिक भूमिका को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। सामाजिक और राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि जब-तक युवा नेतृत्व का केंद्र जनहित के मुद्दों के बजाय बड़े नेताओं की खुशामद और पद प्राप्ति की राजनीति रहेगा, तब तक जिले का वास्तविक विकास संभव नहीं हो पाएगा।
वर्तमान समय में जिले की कई बुनियादी समस्याएं लोगों के सामने हैं। जगह-जगह टूटी सड़कें, जाम की समस्या, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली, बढ़ती बेरोज़गारी, शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियां और प्रशासनिक लापरवाही जैसे मुद्दे आम जनता को प्रभावित कर रहे हैं। इसके बावजूद इन समस्याओं को प्रमुखता से उठाने के बजाय अनेक युवा राजनीतिक कार्यकर्ता केवल नेताओं के गुणगान और सोशल मीडिया प्रचार तक सीमित दिखाई देते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लोकतंत्र में युवा शक्ति परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम होती है। यदि युवा नेता जनता की आवाज़ बनने के बजाय केवल राजनीतिक आकाओं को खुश करने में लगे रहेंगे, तो जनसमस्याओं का समाधान कठिन हो जाएगा। समाज को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और किसानों के मुद्दों पर मजबूती से अपनी बात रखें तथा जिम्मेदारों से जवाब मांगें।
विशेषज्ञों का मानना है कि विकास केवल नारों, पोस्टरों और राजनीतिक प्रचार से नहीं आता, बल्कि इसके लिए ईमानदार सोच, जनहित के प्रति समर्पण और संघर्ष की भावना आवश्यक होती है। युवा नेतृत्व को सत्ता और विपक्ष दोनों के प्रति जवाबदेही की भावना रखते हुए जनता के हितों को सर्वोपरि रखना होगा।
जनपद मऊ के नागरिकों का भी मानना है कि यदि युवा वर्ग सकारात्मक राजनीति और जनसेवा की राह अपनाए, तो जिले के विकास को नई दिशा मिल सकती है। जनता की समस्याओं पर मुखर होकर आवाज़ उठाना ही सच्चे नेतृत्व की पहचान है और यही किसी भी समाज के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला बन सकता है।
