लखनऊ :
सैकड़ों वर्ष पुराने देवी मंदिर के मार्ग पर अतिक्रमण,ग्रामीणों मे आक्रोश,
एसडीएम को सौंपा ज्ञापन।।
दो टूक : लखनऊ के तहसील मोहनलालगंज क्षेत्र के घुसकर गॉव में स्थित सैकड़ों वर्ष पुराने देवी मंदिर तक जाने वाले सार्बजनिक मार्ग पर कथित अतिक्रमण को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। इस मामले में भारतीय जनता पार्टी के मंडल महामंत्री डी.डी. त्रिपाठी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी मोहनलालगंज को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
विस्तार :
भाजपा मण्डल महामंत्री डी डी त्रिपाठी ने बताया कि घुसकर गॉव सैकडों साल पुराने मन्दिर के मार्ग पर दबंगों ने अतिक्रमण कर रखा है जिसे लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है एसडीएम मोहनलालगंज से मिलकर कार्यवाही की मांग करते हुए ज्ञापन सौपा गया है। ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया कि ग्राम समाज की भूमि, खसरा संख्या 1191 पर स्थित प्राचीन देवी स्थल क्षेत्र की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर तक पहुंचने वाला सार्वजनिक मार्ग कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से कब्जा कर अवरूद्ध कर दिया गया है, जिससे श्रद्धालुओं एवं ग्रामीणों को मंदिर तक पहुंचने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
खसरा संख्या 1191 पर हुए कथित अतिक्रमण को तत्काल हटाया जाए एसडीएम मोहनलालगंज को ज्ञापन सौंपते भाजपा मंडल महामंत्री डी.डी. त्रिपाठी ने कहा घुसकर गॉव के खसरा संख्या 1191 पर हुए कथित अतिक्रमण को तत्काल हटाया जाय। यह केवल रास्ते का नहीं, बल्कि ग्रामीणों की आस्था और अधिकारों से जुड़ा मामला है। प्रशासन तत्काल अतिक्रमण हटवाकर कम से कम 20 फीट चौड़ा सार्बजनिक मार्ग बहाल कराए।
वहीं ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में विरोध के बाद संबंधित पक्ष द्वारा लगभग 20 फीट चौड़ा रास्ता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था। कुछ समय तक आवागमन सामान्य रूप से चलता रहा, लेकिन बाद में पुनः अतिक्रमण कर मार्ग को बाधित कर दिया गया। इससे गांव में असंतोष का माहौल बन गया है और लोगों की धार्मिक भावनाएं भी आहत हो रही हैं।
प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग।
भाजपा मंडल महामंत्री डी.डी. त्रिपाठी ने प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि खसरा संख्या 1191 पर हुए कथित अतिक्रमण को तत्काल हटवाकर मंदिर तक जाने के लिए कम से कम 20 फीट चौड़ा सार्वजनिक मार्ग बहाल कराया जाए। उन्होंने कहा कि यह केवल रास्ते का नहीं, बल्कि ग्रामीणों की आस्था और अधिकारों से जुड़ा मामला है।
