मऊ :
महिलाओं को भागीदारी देना कोई उपकार नहीं बल्कि उनका स्वाभाविक अधिकार है : प्रभारीक्षमंत्री।।
।।देवेन्द्र कुशवाहा।।
दो टूक : मऊ जनपद के प्रभारी मंत्री गिरीश चन्द्र यादव ने कलेक्ट्रेट सभागार में 16 व 17 अप्रैल, 2026 को संसद में विपक्ष द्वारा नारी शक्ति वंदन अधिनियम महत्वपूर्ण विधेयकों के विरोध को लेकर महिला जन आक्रोश अभियान को लेकर पत्रकारो के साथ वार्ता किये। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम ने स्पष्ट कर दिया है कि जब भी निर्णय-निर्माण में महिलाओं को समान भागीदारी देने की बात आती है तो विपक्षी पार्टियों द्वारा विरोध किया जाता है। कांग्रेस और उसके सहयोगियों द्वारा दशकों तक महिलाओं को संसद और विधानसभाओं से दूर रखने की साजिश इन दो दिनों की बहस में एक बार फिर उजागर हो गई। विपक्ष के इस महिला-विरोधी रवैये के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सामने सच्चाई रखी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह राजनीति का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित में निर्णय लेने का समय है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की आधी आबादी को नीति-निर्माण में हिस्सा देना कोई उपकार नहीं, बल्कि उनका स्वाभाविक अधिकार है, जिसे कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने दशकों तक बंधक बनाए रखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने यह भी कहा कि जब सभी दल एक साथ आते हैं तो ऐसे मुद्दे राजनीतिक नहीं रह जाते और देश को लाभ होता है। उन्होंने हर सांसद से व्यक्तिगत और दलगत हितों से ऊपर उठने की अपील की। जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाया गया, तब इन विपक्षी दलों ने चुनावों के दबाव में उसका समर्थन किया, लेकिन जब वास्तव में महिलाओं को अधिकार देने का समय आया, तो उनकी महिला-विरोधी सोच खुलकर सामने आ गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने चेतावनी दी कि देश की महिलाएं अब मूक दर्शक नहीं हैं; वे सक्रिय भागीदार हैं और चुनावी परिणामों को सीधे प्रभावित करने की क्षमता रखती हैं। आज लाखों महिलाएं गांवों में पंचायत स्तर पर सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रही हैं और निर्णय ले रही हैं, और अब वे संसद और विधानसभाओं में भी अपनी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी महिला सशक्तिकरण और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने हेतु इन महिला-विरोधी ताकतों के खिलाफ दृढ़ता से लड़ाई लड़ेगी। 16 और 17 अप्रैल को संसद में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक पर हुई चर्चा देश के लोकतांत्रिक भविष्य और महिलाओं की भागीदारी से जुड़ा एक ऐतिहासिक अवसर था। लेकिन इन दो दिनों में केवल एक विधेयक ही सदन में नहीं गिरा, बल्कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी और डीएमके देश की आधी आबादी की नजरों में हमेशा के लिए गिर गए। भारतीय जनता पार्टी 16 और 17 अप्रैल को संसद में पूरे देश ने जो शर्मनाक, अलोकतांत्रिक और महिला-विरोधी आचरण विपक्षी गठबंधन का देखा, उसकी कड़ी निंदा करती है।इन दलों ने केवल संवैधानिक संशोधन या परिसीमन से जुड़े विधेयकों का विरोध नहीं किया, बल्कि भारत की करोड़ों माताओं, बहनों और बेटियों के साथ विश्वासघात किया है।
