सोमवार, 20 अप्रैल 2026

अंबेडकर नगर :महिला सशक्तिकरण की जनपद में अनोखी मिसाल-भ्रष्टाचार पर त्रिदेवियों का प्रहार।।||Ambedkar Nagar:A unique example of women's empowerment in the district - the Tridevis' attack on corruption.||

शेयर करें:
अंबेडकर नगर :
महिला सशक्तिकरण की जनपद में अनोखी मिसाल-भ्रष्टाचार पर त्रिदेवियों का प्रहार।।
।।ए के चतुर्वेदी।।
 दो टूक : जिलाधिकारी ईशा प्रिया, पुलिस अधीक्षक प्राची सिंह और अपर जिलाधिकारी ज्योत्सना बंधु की तिकड़ी, क्या जिले को मिलेगा सच्चा कायाकल्प।
विस्तार:
उत्तर प्रदेश शासन ने महिला सशक्तिकरण की एक बार फिर धमाकेदार मिसाल पेश की है। जनपद अंबेडकर नगर में प्रशासनिक और पुलिस कमान अब तीन महिला अधिकारियों के मजबूत कंधों पर सौंपने की तैयारी है। शासन द्वारा जारी स्थानांतरण सूची में आईएएस ईशा प्रिया को जिलाधिकारी बनाया गया है, जबकि आईपीएस प्राची सिंह जिले की तीसरी महिला पुलिस अधीक्षक बनकर पहले ही कार्यभार संभाल चुकी हैं। श्रीमती ज्योत्सना बंधु अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के पद पर पहले से ही सक्रिय हैं।  यह तिकड़ी महज एक सामान्य तबादला नहीं, बल्कि जिले के लंबे समय से चले आ रहे भ्रष्टाचार, घूसखोरी, थाना-तहसील में दलाली और राजस्व लूट पर सीधा प्रहार करने का शासन का स्पष्ट संकेत है। ईशा प्रिया ने अभी कार्यभार नहीं संभाला है, लेकिन इन तीनों महिला अधिकारियों की संभावित उपस्थिति ने पूरे जनपद में नई उम्मीद जगा दी है।  प्राची सिंह ने पद संभालते ही सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने अपराधियों पर जीरो टॉलरेंस, थाना स्तर पर जवाबदेही और पुलिस व्यवस्था को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने का संकल्प लिया है। ज्योत्सना बंधु राजस्व विभाग में भूमि विवाद, पट्टा वितरण और दलालों के गठजोड़ पर अपनी सूक्ष्म नजर रखे हुए हैं, जबकि ईशा प्रिया के आने से समग्र प्रशासन और विकास कार्यों में नई गति आने की उम्मीद है।  जनता कह रही है कि महिला अधिकारी अक्सर सख्त, ईमानदार और निष्पक्ष साबित होती हैं। अगर यह तिकड़ी मिलकर काम करती है तो थाना-तहसील में बिना घूस के काम, विकास योजनाओं में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर लगाम लगना संभव हो सकता है। लेकिन असली परीक्षा तो कार्यभार संभालने के बाद ही शुरू होगी – क्या अपराध दर घंटेगी, राजस्व मामले तेजी से निपटेंगे और आमजन को बिना दलाली के राहत मिलेगी?  अंबेडकर नगर में यह महिला तिकड़ी भ्रष्टाचार के खिलाफ कितनी धारदार साबित होती है, यह आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा। अगर वादे धरातल पर उतरे तो यह तिकड़ी जिले के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो जाएगी, अन्यथा यह भी एक और मिसाल बनकर रह जाएगी।  *भ्रष्टाचार मुक्त अंबेडकर नगर – क्या यह सपना हकीकत बनेगा?*