शुक्रवार, 6 मार्च 2026

लखनऊ : तीन साइबर लुटेरे अरेस्ट,ATS आफिसर बनकर 90 लाख लिया लूट।।||Lucknow: Three cyber robbers arrested for posing as ATS officers and robbing Rs 90 lakh.||

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लखनऊ : 
तीन साइबर लुटेरे अरेस्ट,ATS आफिसर बनकर 90 लाख लिया लूट।।
दो टूक : लखनऊ की साइबर क्राइम सेल टीम ने फर्जी एटीएस अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट कर 90 लाख की साइबर लूट करने वाले तीन शातिर साइबर लुटेरों को गिरफ्तार कर किया| इससे पहले पांच साइबर लुटेरों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
विस्तार : 
लखनऊ साइफर क्राइम थाना प्रभारी निरीक्षक बृजेश कुमार यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि दिनांक 26.01.2026 श्रीमती वीना बाजपेयी के मोबाइल नंबर पर स्वयं को एटीएस मुख्यालय में तैनात इंस्पेक्टर रंजीत कुमार बताने वाले व्यक्ति का कॉल प्राप्त हुआ। उक्त व्यक्ति ने आतंकवाद एवं मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर अपराधों में संलिप्तता का आरोप लगाकर उन्हें भयभीत किया तथा तत्काल कानूनी कार्रवाई एवं गिरफ्तारी की धमकी दी। इसके उपरांत सिग्नल ऐप डाउनलोड करने के लिए बाध्य किया गया, जहाँ स्वयं को एटीएस अधिकारी बताने वाले अजय प्रताप श्रीवास्तव ने संपर्क किया। उसने कथित जांच, सुप्रीम कोर्ट के फर्जी आदेश एवं सीज़र दस्तावेज दिखाकर यह विश्वास दिलाया कि गिरफ्तारी से बचने एवं खातों की जांच पूर्ण करने हेतु बैंक खातों में जमा धनराशि को सत्यापन के लिए निर्दिष्ट खातों में स्थानांतरित करना आवश्यक है।
भय एवं मानसिक दबाव की स्थिति में वादी एवं उसकी पत्नी से दिनांक 29.01.2026 से 09.02.2026 के मध्य विभिन्न तिथियों पर आरटीजीएस के माध्यम से अलग-अलग बैंक खातों में कुल लगभग ₹90,00,000/- (नब्बे लाख रुपये) अंतरित करा लिए गए। इसके पश्चात अभियुक्तों द्वारा पुनः ₹11,00,000/- की मांग की गई और असमर्थता व्यक्त करने पर गाली-गलौच करते हुए जान-माल की धमकी दी गई। उपरोक्त घटनाक्रम से स्पष्ट है कि अभियुक्तों ने स्वयं को सरकारी अधिकारी बताकर फर्जी गिरफ्तारी एवं न्यायालयीन कार्यवाही का भय उत्पन्न किया, डिजिटल माध्यम से लगातार संपर्क एवं दबाव बनाए रखा और सुनियोजित षड्यंत्र के तहत वादी को मानसिक रूप से बंधक बनाकर ₹90,00,000/- की गंभीर साइबर धोखाधड़ी कारित की।
इस पर अपराध संख्या 23/2026, धारा 318(4)/319(2) भारतीय न्याय संहिता (BNS) एवं धारा 66(D) सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के अंतर्गत मुकदमा पंजीकृत किया गया। 
अनावरण एवं टीम गठन:
उक्त अभियोग के अनावरण हेतु पुलिस आयुक्त लखनऊ तथा  संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय) के निर्देशन में पुलिस उपायुक्त (अपराध), अपर पुलिस उपायुक्त (अपराध) तथा  सहायक पुलिस उपायुक्त, साइबर क्राइम के कुशल पर्यवेक्षण में, साइबर क्राइम थाना लखनऊ के प्रभारी निरीक्षक बृजेश कुमार यादव के नेतृत्व में टीम गठित की गई थी जिसमे पूर्व में 05 को गिरफ्तार कर जेल भेजा चुका है | इसी क्रम में टीम ने घटना का सफल अनावरण करते हुए 03 अन्य शातिर साइबर अपराधी को गिरफ्तार किया।
पूछताछ का विवरण-
पूछताछ के दौरान अभियुक्त धीरज पुत्र मुकेश कुमार ने बताया कि उसने खाताधारक राहुल पाल का बैंक खाता कोटक महिंद्रा बैंक शाखा राजाजीपुरम, लखनऊ में अभियुक्त स्पर्श कपूर के कहने पर खुलवाया था। इस कार्य के बदले उसे ₹8,000/- प्राप्त हुए थे।
अभियुक्त स्पर्श कपूर पुत्र स्व० सुधीर कपूर से पूछताछ करने पर उसने बताया कि उसने खाताधारक राहुल पाल के खाते से चेक के माध्यम से धनराशि निकालकर अभियुक्त आशीष चन्द्रा को दी थी। इस कार्य के बदले उसे ₹10,000/- प्राप्त हुए थे।
अभियुक्त आशीष चन्द्रा पुत्र सुधाकर से पूछताछ करने पर उसने बताया कि उसने स्पर्श कपूर को राहुल पाल के खाते में आए फ्रॉड के ₹2,45,000/- रुपये निकालने के लिए कोटक महिंद्रा बैंक शाखा राजाजीपुरम भेजा था। स्पर्श द्वारा उक्त धनराशि निकालकर उसे दी गई थी।
अभियुक्त आशीष चन्द्रा ने यह भी बताया कि वह विभिन्न खातों से प्राप्त धनराशि को USDT (क्रिप्टोकरेंसी) में कन्वर्ट करने का कार्य करता है। अभियुक्त आशीष चन्द्रा के मोबाइल फोन की जांच करने पर उसमें USDT से संबंधित लेन-देन एवं साइबर फ्रॉड से संबंधित डाटा पाया गया, जिसका प्रिंटआउट साइबर कैफे से निकालकर केस डायरी में संलग्न किया गया है।
पूछताछ से स्पष्ट हुआ कि सभी अभियुक्तगण आपस में मिलकर योजनाबद्ध तरीके से साइबर फ्रॉड से प्राप्त धनराशि को बैंक खातों के माध्यम से निकालकर क्रिप्टोकरेंसी में कन्वर्ट करने का कार्य करते थे।
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🔹 *गिरोह का अपराध करने का तरीका (Modus Operandi)*
उपरोक्त प्रकरण मु0अ0सं0 23/2026 धारा 318(4), 319(2), 351(4), 61(2)(A), 308(6) BNS एवं 66D आईटी एक्ट से संबंधित अभियुक्तगण द्वारा अपनाई गई कार्यप्रणाली (Modus Operandi) निम्न प्रकार पाई गई —
• अभियुक्तगण द्वारा योजनाबद्ध तरीके से डिजिटल अरेस्ट / साइबर फ्रॉड से संबंधित धनराशि को प्राप्त करने हेतु बैंक खातों का उपयोग किया जाता था।
• गिरोह के सदस्य जरूरतमंद या अनजान व्यक्तियों के नाम से बैंक खाते खुलवाते थे तथा उनके चेक पर हस्ताक्षर करवा लेते थे।
• इन खातों का उपयोग साइबर फ्रॉड से प्राप्त धनराशि को प्राप्त करने (Receive) एवं निकालने (Withdraw) के लिए किया जाता था।
• खातों से धनराशि चेक के माध्यम से निकाली जाती थी, ताकि लेन-देन का सीधा लिंक मुख्य अभियुक्तों से न जुड़े।
• निकाली गयी धनराशि को गिरोह के अन्य सदस्य के पास पहुंचाया जाता था।
• इसके बदले खाते खुलवाने वाले व पैसे निकालने वाले व्यक्तियों को कमीशन के रूप में निश्चित धनराशि दी जाती थी।
• मुख्य अभियुक्त द्वारा प्राप्त धनराशि को आगे USDT (क्रिप्टोकरेंसी) में कन्वर्ट कर दिया जाता था, जिससे धनराशि का ट्रैक करना कठिन हो जाए।
• इस प्रकार गिरोह के सदस्य आपस में मिलकर संगठित तरीके से साइबर फ्रॉड की धनराशि को बैंक खातों व क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से ट्रांसफर एवं कन्वर्ट करते थे।
🔹 *पूर्व में गिरफ्तार अभियुक्तगण-*
*उक्त अभियोग में साइबर क्राइम थाना लखनऊ द्वारा पूर्व में भी प्रभावी कार्यवाही करते हुए दिनांक 17.02.2026 को तीन तथा 02.03.2026 को दो अभियुक्तों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा जा चुका है, जिनका विवरण निम्नवत् है —*
1. मयंक श्रीवास्तव, निवासी थाना पिपराइच, जनपद गोरखपुर ।
2. इरशाद, निवासी थाना निवाड़ी, जनपद गाजियाबाद ।
3. मनीष कुमार, निवासी थाना प्रेमनगर, मुंडका, दिल्ली ।
4. मनोज यादव निवासी थाना थोई, जनपद सीकर, राजस्थान |
5. जितेन्द्र यादव उर्फ जीतू निवासी थाना थोई, जनपद सीकर, राजस्थान |
उक्त अभियुक्तगण भी इस संगठित साइबर ठगी गिरोह का हिस्सा थे तथा इनके विरुद्ध विधिक कार्यवाही करते हुए न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर जेल भेजा गया है।
*गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण :*
1. धीरज पुत्र मुकेश कुमार निवासी मकान संख्या 356/300, सरिपुरा रोड, राजाजीपुरम, थाना तालकटोरा, लखनऊ ।
2. स्पर्श कपूर पुत्र स्व० सुधीर कपूर निवासी C-21/49, नागेश्वर मंदिर के निकट, तिरंगा मेडिकल स्टोर के पास, थाना तालकटोरा, राजाजीपुरम, जनपद लखनऊ ।
3. आशीष चन्द्रा पुत्र सुधाकर निवासी निकट सुभाष मैरिज हॉल, पंडितखेड़ा, थाना कृष्णानगर, जनपद लखनऊ ।
*गिरफ्तारी करने वाली टीम :*
1. निरीक्षक विकास कुमार सिंह, साइबर क्राइम थाना लखनऊ |
2. उ0नि0 रोहित पंवार, साइबर क्राइम थाना लखनऊ |
3. उ0नि0 रजत कौशिक, साइबर क्राइम थाना लखनऊ |
4. आरक्षी प्रभात गुप्ता, साइबर क्राइम थाना लखनऊ |
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*अपील / सलाह:*
 भारत में डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए ऐसी किसी भी कॉल से डरे नहीं |
 ट्रेडिंग या इन्वेस्टमेंट जैसे लुभावने साइबर अपराध से बचे |
 साइबर ठगी होने पर तुरंत इसकी शिकायत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नं0-1930 या cybercrime.gov.in पर दर्ज कराएं ।