गुरुवार, 26 फ़रवरी 2026

लखनऊ :श्रीकृष्ण जन्मभूमि से काशी विश्वनाथ धाम को रवाना हुई गुलाल-यात्रा।Lucknow:The Gulal Yatra departed from Shri Krishna Janmabhoomi to Kashi Vishwanath Dham.||

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मथुरा  :
श्रीकृष्ण जन्मभूमि से काशी विश्वनाथ धाम को रवाना हुई गुलाल-यात्रा।
●अभिभूत हो उठे ब्रजवासी एवं श्रद्धालु।
दो टूक : !! कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् !! मथुरा जनपद के श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि रंगभरी एकादशी के पावन अवसर पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि एवं काशी विश्वनाथ धाम में होली का मुख्य आयोजन होता है। विगत वर्ष से स्थापित अलौकिक परंपरा जिसमें काशी विश्वनाथ धाम और श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मध्य होली के अवसर पर फाग भेजने की परंपरा शुरू हुई है। इस वर्ष काशी विश्वनाथ धाम से श्रीकृष्ण जन्मभूमि की रंगारंग लठामार होली कार्यक्रम के लिए सुगन्धित द्रव्य, गुलाल, वस्त्र, प्रसाद आदि सामग्री प्राप्त हुई है। जिसको रंगभरी एकादशी महोत्सव में विशिष्टता के साथ होली कार्यक्रम में अर्पित किया जायेगा।
गुरुवार फाल्गुन शुक्ल दशमी तद्नुसार दिनांक 26 फरवरी को श्रीकृष्ण जन्मभूमि से नील-गुलाल, प्रसाद, फल एवं मेवा आदि सामग्री भव्य गुलाल-यात्रा, उद्दाम नृत्य एवं संकीर्तन के मध्य में श्रीकृष्ण जन्मभूमि से काशी विश्वनाथ धाम, वाराणसी के लिए रवाना की गयी। इस दिव्य गुलाल-यात्रा में होली के भाव के अनुरूप ग्वाल-गोपी होली के रसिया पर नृत्य करते हुऐ चल रहे थे, साथ ही संतजन भी ढोल, मृदंग, झांझ, मजीरे की मंगल ध्वनि पर उद्दाम संकीर्तन एवं नृत्य कर रहे थे। होली के परंपरागत वाद्ययंत्रों पर झूमते, नाचते एवं होली गायन करते हुऐ हजारों श्रद्धालु एवं बंजवासी काशी विश्वनाथ जी की 'गुलाल यात्रा में सम्मिलित होकर अभिभूत थे।
ज्ञातव्य है कि भगवान श्रीकृष्ण और राधाजी की प्रिय होली लीला में भगवान शिव का विशिष्ट स्थान है। भगवान शिव के हृदय में बसन्त भाव उत्पन्न हुआ वह भी होली खेलने के लिए ब्रज में पधारे। भगवान शिव के विचित्र रूप को देखकर गोपियों आश्चर्यचकित होते हुये कहा कि मै केसे होरी खेलूं या बावरिया के संग, अंग भभूत, गले विषमाला, लटकन बिराजै गंग, मैं कैसे होरी खेलूं या बावरिया के संग ।
 इसके उपरान्त भगवान कृष्ण के संकेत को पाकर भगवान शिव ने गोपी रूप धारण किया और प्रिया-प्रियतम की इस प्रिय लीला में सम्मिलित हुए, आज भी रंगेश्वर महादेव के रूप में रंगीली गली में विराजमान हैं।
जिस ब्रज भाव और होली के आनन्द को प्राप्त करने के लिए भगवान शिव ने गोपी रूप धारण किया, आज उसी होली लीला की प्रसादी को भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि से काशी विश्वनाथ धाम भेजा गया है। चूँकि काशी विश्वनाथ धाम एवं श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर होली का मुख्य आयोजन रंगभरी एकादशी के दिन होता है। अतः काशी विश्वनाथ धाम एवं श्रीकृष्ण जन्मभूमि के प्रमुख होली उत्सव में परस्पर आदान-प्रदान से प्राप्त दिव्य प्रसाद का उपयोग होगा, जिसका लाभभक्तजन ले सकेंगे।
श्रीकृष्ण-जन्मस्थान सेवा-संस्थान के सचिव श्री कपिल शर्मा एवं प्रबंध समिति के सदस्य श्री गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि से काशी विश्वनाथ धाम, वाराणसी को गयी गुलाल-यात्रा को पुष्प वर्षा एवं नमन कर रवाना किया। ब्रज के लोक कलाकार राजेश शर्मा एवं ग्रुप, गोवर्धन, मथुरा के गुलाल यात्रा में ब्रज होली के भाव को साकार किया। शाभोयात्रा भव्य सुसज्जित वाहन में प्रातः 10:00 बजे काशी विश्वनाथ धाम के लिए रवाना हुई। संस्थान के पूजाचार्य राम अवतार अवस्थी, राजीव गुप्ता, राकेश शर्मा एवं मौसम अग्रवाल श्रीकृष्ण जन्मभूमि से श्रीकाशी विश्वनाथ धाम, वाराणसी की गुलाल यात्रा में सम्मलित हैं।
●भक्ति भाव मे झूमते भक्तगण।