रविवार, 25 जनवरी 2026

राजघाट की पावन भूमि पर गूंजा ‘अनहद नाद’ — ऊर्जा, शांति और आत्म-जागरण का अद्भुत संगम!!

शेयर करें:

राजघाट की पावन भूमि पर गूंजा ‘अनहद नाद’ — ऊर्जा, शांति और आत्म-जागरण का अद्भुत संगम!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक//नई दिल्ली।
शांति, सत्य और आध्यात्मिक चेतना की प्रतीक पावन भूमि राजघाट में रविवार को एक दिव्य और अलौकिक वातावरण उस समय साकार हो उठा, जब नोएडा निवासी ग्लोबल हीलर, एनर्जी अल्केमिस्ट एवं आत्मा-मार्गदर्शक रेखा मल्होत्रा द्वारा आयोजित “अनहद नाद एनर्जी सर्कल” का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आत्मा को छू लेने वाला गहन आध्यात्मिक अनुभव बन गया।

रेखा मल्होत्रा के मार्गदर्शन में आयोजित इस ऊर्जा-सत्र का उद्देश्य समृद्धि, मानसिक संतुलन और आत्म-जागरण था। कार्यक्रम के दौरान मंत्रों, भजनों, ध्यान और गहन मौन के माध्यम से ऐसी सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ, जिसने उपस्थित जनसमूह को भीतर तक स्पर्श किया। कई प्रतिभागी भावनाओं में बहकर भावुक हो उठे और कुछ की आंखों से अश्रुधारा स्वतः बह निकली।

रेखा मल्होत्रा ने अपने संबोधन में कहा कि अनहद नाद वह दिव्य ध्वनि है, जो किसी वाद्य यंत्र से उत्पन्न नहीं होती, बल्कि अंतरिक्ष और आत्मा के गहन स्तर से निकलती है। जब यह ध्वनि राजघाट की पवित्रता में गूंजी, तो लोगों ने भीतर गहरी शांति, हल्कापन और आत्मिक जुड़ाव का अनुभव किया।

कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इसे एक आध्यात्मिक चिकित्सा बताया, जहां ध्वनि स्वयं समाधान बन गई और मौन ने मार्गदर्शन का कार्य किया। यह आयोजन किसी प्रदर्शन या औपचारिकता तक सीमित नहीं था, बल्कि आधुनिक जीवन की भागदौड़, तनाव और असंतुलन के बीच आत्मा के लिए एक सशक्त औषधि सिद्ध हुआ।

अनहद नाद एनर्जी सर्कल ने यह संदेश दिया कि आज के भौतिक युग में भी आध्यात्मिक चेतना, ध्वनि और मौन के माध्यम से जीवन में संतुलन, शांति और सकारात्मक परिवर्तन संभव है। राजघाट की पावन धरती पर आयोजित यह कार्यक्रम लंबे समय तक प्रतिभागियों के मन और आत्मा में अपनी दिव्य छाप छोड़ गया।