सुल्तानपुर :
जिन्होंने एक बार भी आंदोलन में भाग नहीं लिया वही ट्रस्टी बना दिए गए : रामभद्राचार्य।
।। ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह रवि ।।
दो टूक : अजीब विडम्बना है कि जिन्होंने एक बार भी राम जन्मभूमि आंदोलन में भाग नहीं लिया उन्हें ही मंदिर का ट्रस्टी बना दिया गया।आतंकवादी की कोई जाति नहीं होती। संतो ने गांवों को छोड़ दिया इससे गांव का बड़ा दुरूपयोग हुआ।यह बातें चित्रकूट तुलसी पीठाधीश्वर रामभद्राचार्य ने कहीं।
वह विजेथुआ महोत्सव के पांचवें दिन वाल्मीकि रामायण कथा सुना रहे थे। उन्होंने कहा कि अवध और अवधी दोनों मुझे बहुत भाती है। यह मेरी और मेरे आराध्य की जन्मभूमि है। सभी सनातनियों को मस्तक पर तिलक जरूर करना चाहिए। तिलक लगाने के अनेक फायदे हैं। तिलक के बिना ब्राह्मण यमराज जैसा दिखता है। एक सूक्ति में बताया गया है कि ताम्बुल के बिना राजा,तिलक के बिना ब्राह्मण व्याकरण के बिना वाणी और नमक के बिना भोजन अच्छा नहीं लगता।
बताया कि विश्वामित्र ने दशरथ से कहा कि राक्षस यज्ञ में बाधा पहुंचा रहे हैं इसलिए आप अपने पुत्र को मुझे दीजिए । दशरथ ने कहा मैं राम को नहीं दे सकता । फिर वशिष्ठ के समझाने के बाद दशरथ ने राम को विश्वामित्र के साथ विदा किया। विश्वामित्र ने राम को बला अतिबला विद्या प्रदान की ।
पद्मविभूषण स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि अवध और अवधी दोनों मुझे बहुत भाती है। उन्होंने अपना गीत गाते हुए कहा त्रिभुवन विदित अवध जेकर नौवां , बड़ा निक लागै राघव जी के गउंवा। बताया कि राम ने सबसे पहला वध ताटका का किया था। इसके बाद विश्वामित्र ने राम को सभी दिव्यास्त्र दिये।राम ने मारीच को ऐसा बाण मारा कि वह समुद्र पार मारीच शीर्ष जाकर गिरा उस स्थान का नाम बिगड़ कर आजकल मारीशस हो गया है।
आयोजक विवेक तिवारी ने सपत्नीक व्यासपीठ का पूजन किया। इस अवसर पर स्वीडन और लातविया में भारत के राजदूत राकेश तिवारी,विधायक राजेश कुमार गौतम, विधान परिषद सदस्य शैलेन्द्र प्रताप सिंह, डॉ सीताशरण त्रिपाठी, रामार्य पाठक, हाईकोर्ट अधिवक्ता राजेश तिवारी, डॉ सुरेन्द्र प्रताप तिवारी, रितेश दूवे, सर्वेश मिश्र, रामविनय सिंह,विद्याधर मिश्र, अमरीश मिश्र, मनोज तिवारी, विवेकानंद उपाध्याय,डा.हरिश्चन्द्र श्रीवास्तव आदि लोग मौजूद रहे।
