शनिवार, 10 अक्टूबर 2026

लखनऊ : महाविद्यालय में संगोष्ठी आयोजित, तनाव,अवसाद,मोटापा और इंटरनेट की लत पर हुई चर्चा।||Lucknow: A seminar was held at the college, discussing stress, depression, obesity, and internet addiction.||

शेयर करें:
लखनऊ : 
महाविद्यालय में संगोष्ठी आयोजित, तनाव,अवसाद,मोटापा और इंटरनेट की लत पर हुई चर्चा।
दो टूक : विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर शनिवार को राजेंद्र नगर स्थित नवयुग कन्या महाविद्यालय में मानसिक स्वास्थ्य एवं महिला स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर संगोष्ठी आयोजित की गई। मनोविज्ञान विभाग के अभिव्यक्ति क्लब और राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने महिलाओं के मानसिक, यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। संगोष्ठी की थीम ‘स्वस्थ मन, स्वस्थ महिलाएं, स्वस्थ समाज’ रही।
 विशेषज्ञों ने कहा कि महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर सामाजिक संकोच और चुप्पी दूर करना जरूरी है। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर खुलकर बात करने, समय पर विशेषज्ञों की सलाह लेने और संतुलित जीवनशैली अपनाने से बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है।
विस्तार :
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर आयोजित संगोष्ठी का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया। मुख्य वक्ता किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. सुजाता देव ने महिलाओं के यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि अस्वस्थ जीवनशैली मोटापे और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का प्रमुख कारण बन सकती है। मोटापे से महिलाओं के शारीरिक और प्रजनन स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इससे बचाव के लिए नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और सक्रिय जीवनशैली अपनाना आवश्यक है।
डॉ. सुजाता देव ने रिश्तों में पारस्परिक सम्मान, स्वस्थ सीमाओं और प्रभावी संवाद को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने छात्राओं से अपील की कि वे अपने शारीरिक, मानसिक, यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा करने में संकोच न करें और जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों से परामर्श लें।
केजीएमयू के मनोचिकित्सा विभाग की प्रोफेसर एवं क्लिनिकल/बाल मनोवैज्ञानिक डॉ. पूजा महौर ने युवा महिलाओं में होने वाली सामान्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बच्चों और किशोर-किशोरियों में चिंता एवं अवसाद की बढ़ती समस्याओं के प्रति सजग रहने की जरूरत बताई। संकट की स्थिति में प्रभावित व्यक्ति को भावनात्मक सहारा देने के लिए मनोवैज्ञानिक प्राथमिक सहायता के कौशल विकसित करने पर भी जोर दिया।
डॉ. पूजा महौर ने कहा कि दूसरों की मदद करने से व्यक्ति के अपने मानसिक कल्याण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने युवाओं को गहरी सांस लेने का अभ्यास करने, सामाजिक सहयोग बढ़ाने और वास्तविक जीवन में सार्थक संबंध विकसित करने की सलाह दी। साथ ही, इंटरनेट की बढ़ती लत और अत्यधिक स्क्रीन टाइम पर चिंता जताते हुए स्वस्थ पारस्परिक संबंधों को मजबूत बनाने की आवश्यकता बताई।
महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर मंजुला उपाध्याय ने कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए महिलाओं के मानसिक, यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य को उचित महत्व देना जरूरी है। महिलाओं को अपनी समस्याएं खुलकर साझा करने, समय पर सहायता लेने और अपने शारीरिक व भावनात्मक कल्याण के लिए जागरूक होकर निर्णय लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम का संचालन मनोविज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सोनल अग्रवाल ने किया। इस दौरान 24 अगस्त 2026 को आयोजित तनाव प्रबंधन विषयक भाषण प्रतियोगिता की विजेता छात्राओं को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। संगोष्ठी में छात्राओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
इस अवसर पर प्रोफेसर संगीता कोतवाल, प्रोफेसर संगीता शुक्ला, प्रोफेसर सुषमा त्रिवेदी, डॉ. (मेजर) मनमीत कौर सोढी, प्रोफेसर विनीता सिंह, डॉ. सुनीता सिंह, डॉ. अंकिता तिवारी, श्रीमती नीलम यादव, डॉ. स्नेहा चौधरी सहित अन्य शिक्षक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के आयोजन में डॉ. सोनल अग्रवाल, डॉ. गगनप्रीत कौर, डॉ. सुकन्या तिवारी, मानसी श्रीवास्तव तथा एनएसएस टीम की डॉ. मनीषा बारौनिया, डॉ. चंदन मौर्या और दीक्षा का सहयोग रहा।