लखनऊ :
बारिश में कूड़े के बदबू का सम्राज्य,कूड़े में दफन हुई वृन्दावन की ग्रीन बेल्ट।।
◆लापरवाही की हद एक साल से अफसरों के आदेश पर भी नहीं लगा पीसीटीएस, जिम्मेदार कौन ?|
दो टूक : राजधानी में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर नगर निगम के तमाम दावों के बीच वृंदावन योजना में कूड़ा प्रबंधन की बदहाल तस्वीर सामने आई है। सेक्टर-5ई के मुख्य मार्ग पर ग्रीन बेल्ट की जमीन पर बना खुला पड़ाव घर अब कूड़े के बड़े डंपिंग प्वाइंट में तब्दील हो चुका है। यहां आसपास के इलाकों के साथ कई वार्डों का कूड़ा एवं अस्पताल के सर्जिकल बेस्ट लाकर खुले में डंप किए जाने से सड़क किनारे गंदगी का अंबार और चारों ओर दुर्गंध फैली है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि खुले पड़ाव घर को खत्म कर यहां पोर्टेबल कॉम्पैक्टर ट्रांसफर स्टेशन (पीसीटीएस) लगाने के निर्देश करीब एक साल पहले दिए गए थे, लेकिन अब तक अमल नहीं हुआ। पूर्व नगर आयुक्त इन्द्रजीत सिंह के निर्देश के बावजूद पीसीटीएस नहीं लग पाया तो सवाल सीधे संबंधित कार्यदायी कंपनी लायन इनवायरो और नगर निगम की निगरानी व्यवस्था पर उठ रहे हैं। स्थानीय वासियों एवं राहगीरों का पास निकलना मुश्किल हो गया है पास मे दो स्कूल है जहां मासूम बच्चे पढ़ते है और बारिश में कूड़े सढ़ने से संक्रमण फैलने की आशंकाएं बनी हुई है।
विस्तार :
बताते चले लखनऊ नगर निगम जोन आठ के खरिका वार्ड द्वितीय के वृन्दावन योजना सेक्टर 5 और 6के बीच नहर के किनारे बने ग्रीन बेल्ट मे खुले में कूड़े का डम्पिंग यार्ड बना हुआ है। जिसका कूड़ा सड़क पर दो मीटर तक फैलता रहता है।
●ग्रीन बेल्ट पर कूड़ा, स्वच्छता के दावे हवा में।
जिस ग्रीन बेल्ट का इस्तेमाल हरियाली और पर्यावरण संरक्षण के लिए होना चाहिए, उसी जमीन पर खुले में कूड़ा डंप होने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है। कूड़े के ढेर से उठती बदबू और आवारा जानवरों के जमावड़े के कारण राहगीरों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पीसीटीएस लगाने का मकसद ही कूड़े को खुले में रखने के बजाय व्यवस्थित तरीके से ट्रांसफर करना और दुर्गंध व गंदगी पर नियंत्रण करना था। मगर जिम्मेदारों की कथित सुस्ती ने पूरी व्यवस्था को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।
●सबसे गंभीर सवाल: खुले पड़ाव घर में सर्जिकल कूड़ा क्यों?
मामला सामान्य घरेलू कूड़े तक सीमित नहीं है। नगर निगम के ट्रैक्टर-ट्रॉली से सर्जिकल कूड़ा भी यहां लाकर डाले जाने के आरोप हैं। नीली पन्नियों में भरा कथित सर्जिकल वेस्ट खुले पड़ाव घर में पहुंचने से स्थानीय लोगों में संक्रमण और स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
क्षेत्रीय निवासी एवं सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश द्विवेदी के मुताबिक, यहां कई वार्डों का कूड़ा डाला जाता है। उनका आरोप है कि वेदांता अस्पताल तक का नीली पन्नियों में भरा सर्जिकल कूड़ा भी इस पड़ाव घर में डाला जा रहा है।
●एक साल से इंतजार... आखिर किसकी जिम्मेदारी?
नगर निगम के स्तर पर जब खुले पड़ाव घर को खत्म कर पीसीटीएस लगाने के निर्देश दिए गए थे तो फिर एक साल में काम पूरा क्यों नहीं हुआ? यदि संबंधित कंपनी काम नहीं कर रही थी तो उसके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई? और यदि खुले में कूड़ा डंप किया जा रहा है तो नगर निगम की निगरानी टीम ने इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए?
◆दो टूक सवाल ? --
ग्रीन बेल्ट पर खुलेआम कूड़ा डंप होता रहा और जिम्मेदार देखते रहे तो आखिर स्वच्छता व्यवस्था की जवाबदेही किसकी है?
वृंदावन योजना के सेक्टर-5 की यह तस्वीर सिर्फ गंदगी की कहानी नहीं, बल्कि नगर निगम के कूड़ा प्रबंधन, निगरानी और जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान है।
खुले पड़ाव घर में कई वार्डों का एवं सर्जिकल वेस्ट डाले जाने के आरोप से कालोनी वासियों की चिंता बढ़ी—दुर्गंध और संक्रमण के साये में राहगीरो समेत स्थानीय लोग जी रहे है।
