सोमवार, 31 अगस्त 2026

मऊ :‘साहब ! सड़क बनवा दीजिए... स्कूल जाते समय चोट लगती है’—7 साल की समरा की गुहार पर डीएम ने लिया संज्ञान।||Mau:"Sir! Please get the road built... I get hurt going to school."—The District Magistrate took cognizance of 7-year-old Samra's plea.||

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मऊ :
‘साहब ! सड़क बनवा दीजिए... स्कूल जाते समय चोट लगती है’—7 साल की समरा की गुहार पर डीएम ने लिया संज्ञान।
।।देवेन्द्र कुशवाहा।।
दो टूक : गड्ढों और कीचड़ भरी 25 मीटर की राह बनी मासूम के लिए मुसीबत, ड्रेस गंदी होने पर स्कूल में सुननी पड़ती है डांट।
विस्तार :
 “साहब, सड़क बनवा दीजिए... स्कूल जाते समय चोट लग जाती है और ड्रेस भी गंदी हो जाती है।” सात साल की समरा नाज़ के मुंह से निकले ये शब्द सिर्फ एक बच्ची की शिकायत नहीं, बल्कि सिस्टम के सामने खड़ी एक बड़ी तस्वीर हैं।
पहली कक्षा में पढ़ने वाली समरा सोमवार को अपनी फरियाद लेकर जिलाधिकारी आनंद वर्धन के पास पहुंची। वार्ड संख्या-17 की रहने वाली समरा ने डीएम को बताया कि उसके स्कूल जाने वाले रास्ते का करीब 25 मीटर हिस्सा कच्चा और बदहाल है। रास्ते में जगह-जगह गड्ढे और कीचड़ है। स्कूल जाते समय कई बार पैर फिसलने से उसे चोट लग जाती है। बारिश में हालात और भी खराब हो जाते हैं।
मासूम ने बताया कि कीचड़ से होकर गुजरने के कारण उसकी स्कूल ड्रेस भी गंदी हो जाती है और विद्यालय में उसे डांट सुननी पड़ती है। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें और सपने होने चाहिए, उस उम्र में समरा को सुरक्षित स्कूल पहुंचने के लिए सड़क की गुहार लगानी पड़ रही है।
मासूम की फरियाद पर हरकत में आया प्रशासन
समरा की बात सुनकर जिलाधिकारी आनंद वर्धन ने मामले को गंभीरता से लिया और संबंधित अधिकारियों को तत्काल मौके पर जाकर स्थलीय निरीक्षण करने के निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि जांच के बाद सड़क को दुरुस्त कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी।
उन्होंने बताया कि संबंधित मार्ग नगर पालिका क्षेत्र के अंतर्गत आता है।
अब देखना है—समरा की आवाज सड़क तक कब पहुंचती है
सात साल की समरा की यह फरियाद प्रशासन के लिए एक छोटी शिकायत नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और बुनियादी नागरिक सुविधाओं पर बड़ा सवाल है। डीएम के संज्ञान के बाद अब उम्मीद जगी है कि वर्षों से बदहाल पड़ा करीब 25 मीटर रास्ता जल्द ही पक्का होगा और मासूमों को गड्ढों-कीचड़ के बीच से होकर स्कूल जाने की मजबूरी से राहत मिलेगी।
समरा ने अपनी बात कह दी है... अब जिम्मेदारों की बारी है कि वे उस मासूम की आवाज को सड़क तक पहुंचाएं।