गौतमबुद्धनगर: नोएडा में 'ऑपरेशन साइबर वज्र' की बड़ी सफलता: 14.90 लाख की साइबर ठगी का खुलासा, दो आरोपी गिरफ्तार!!
!!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!
दो टूक//ग्रेटर नोएडा। साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर के विशेष अभियान 'ऑपरेशन साइबर वज्र' के तहत थाना बीटा-2 पुलिस और एसओजी ग्रेटर नोएडा ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर फर्जीवाड़ा कर लाखों रुपये की ठगी करने का आरोप है। पुलिस ने इनके कब्जे से वारदात में प्रयुक्त चार मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रीतम पुत्र कांची रावल निवासी घोड़ी बछेड़ा, थाना दादरी (गौतमबुद्धनगर) तथा सन्नी ठाकुर पुत्र सुरेश ठाकुर निवासी साहिबाबाद (गाजियाबाद) के रूप में हुई है। दोनों को थाना बीटा-2 क्षेत्र के अल्फा-2 इलाके से गिरफ्तार किया गया।
जांच में सामने आया कि थाना बीटा-2 पुलिस को एनसीआरपी (NCRP) और समन्वय पोर्टल के माध्यम से विभिन्न राज्यों के पीड़ितों द्वारा दर्ज साइबर ठगी की शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इन शिकायतों के आधार पर पुलिस ने बैंक खातों और डिजिटल साक्ष्यों का तकनीकी विश्लेषण किया। जांच के दौरान पता चला कि 10 सितंबर 2025 को अज्ञात साइबर अपराधियों ने साउथ इंडिया बैंक के साथ 49.39 लाख रुपये की बड़ी धोखाधड़ी की थी।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि ठगी की रकम तीन अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर की गई थी। इनमें से 14.90 लाख रुपये की राशि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के जिस खाते में पहुंची, वह खाता आरोपी प्रीतम के नाम पर पंजीकृत था। तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर पुलिस ने पाया कि प्रीतम ने अपने साथी सन्नी ठाकुर के साथ मिलकर संगठित तरीके से इस साइबर ठगी को अंजाम दिया।
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से घटना में इस्तेमाल किए गए चार मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनकी डिजिटल जांच की जा रही है। पुलिस का मानना है कि इस गिरोह के तार अन्य राज्यों और अन्य साइबर अपराधियों से भी जुड़े हो सकते हैं।
थाना बीटा-2 में आरोपियों के खिलाफ मु0अ0सं0 252/2026 के तहत धारा 112 बीएनएस में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस फरार अन्य आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है और मामले की गहन जांच जारी है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधों में शामिल नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए तकनीकी जांच और बैंकिंग ट्रेल के आधार पर आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।
