मंगलवार, 19 मई 2026

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: आवारा और खतरनाक कुत्तों पर सख्ती, राज्यों को दिए कड़े निर्देश!!

शेयर करें:

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: आवारा और खतरनाक कुत्तों पर सख्ती, राज्यों को दिए कड़े निर्देश!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक//नई दिल्ली। देशभर में बढ़ते डॉग अटैक और आवारा कुत्तों के आतंक को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बेहद अहम और सख्त फैसला सुनाया। अदालत ने साफ कहा कि बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने आवारा कुत्तों को सार्वजनिक स्थानों से हटाने, उनकी नसबंदी और खतरनाक कुत्तों पर कार्रवाई को लेकर 7 नवंबर 2025 के अपने पुराने आदेश को बरकरार रखते हुए सभी पुनर्विचार याचिकाएं खारिज कर दीं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों से लगातार ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जहां आवारा कुत्तों ने मासूम बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों पर हमला किया। अदालत ने टिप्पणी की कि अब इस गंभीर समस्या से आंखें मूंदकर नहीं बैठा जा सकता। कोर्ट ने माना कि सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है और कई विदेशी पर्यटक भी इस तरह की घटनाओं का शिकार हुए हैं।

हर जिले में बनेगा ABC सेंटर

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि हर जिले में कम से कम एक पूरी तरह कार्यरत एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर स्थापित किया जाए। इन केंद्रों में नसबंदी, इलाज, सर्जरी और पशुओं की देखभाल के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही वहां काम करने वाले कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण देने के भी आदेश दिए गए हैं।

अदालत ने कहा कि राज्यों की जिम्मेदारी केवल कागजी योजनाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी व्यवस्था तैयार करनी होगी ताकि आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण पाया जा सके।

एंटी रेबीज वैक्सीन की उपलब्धता अनिवार्य

सुप्रीम कोर्ट ने सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-रेबीज वैक्सीन और इम्यूनोग्लोबुलिन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि डॉग बाइट के मामलों में समय पर इलाज नहीं मिलने से कई लोगों की जान खतरे में पड़ जाती है, इसलिए स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को मजबूत करना बेहद जरूरी है।

इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर घूमने वाले आवारा पशुओं की समस्या को लेकर भी अदालत ने सख्त रुख अपनाया और संबंधित एजेंसियों को तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करने को कहा।

खतरनाक और रेबीज संक्रमित कुत्तों को मारने की अनुमति

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यदि कोई कुत्ता लाइलाज रूप से बीमार हो, रेबीज से संक्रमित हो या अत्यधिक आक्रामक एवं खतरनाक हो, तो मानव जीवन की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उसे निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत मारने पर विचार किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि यह कार्रवाई पशु जन्म नियंत्रण नियमों और अन्य वैधानिक प्रोटोकॉल के अनुसार ही की जाएगी।

आदेश लागू करने वाले अधिकारियों को सुरक्षा

शीर्ष अदालत ने कहा कि जो अधिकारी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को लागू करेंगे, उनके खिलाफ किसी प्रकार की एफआईआर या आपराधिक कार्रवाई नहीं की जाएगी, बशर्ते उन्होंने अपना काम ईमानदारी और कानून के तहत किया हो। कोर्ट ने साफ किया कि अधिकारियों को डर के माहौल में काम नहीं करना चाहिए।

हाई कोर्ट्स को स्वत: संज्ञान लेने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी हाई कोर्ट्स को निर्देश दिया कि वे इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए अपने-अपने राज्यों में आदेशों के पालन की निगरानी करें। अदालत ने कहा कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार हाई कोर्ट अतिरिक्त दिशा-निर्देश जारी कर सकते हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की मूल भावना कमजोर नहीं होनी चाहिए।

साथ ही अदालत ने चेतावनी दी कि जो अधिकारी आदेशों का पालन नहीं करेंगे या जानबूझकर लापरवाही बरतेंगे, उनके खिलाफ संबंधित अदालतें सख्त कार्रवाई करें।

इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने की। विस्तृत सुनवाई के बाद अदालत ने 29 जनवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया है।