मंगलवार, 19 मई 2026

कौशांबी: बेटे की हत्या के मामले में उम्रकैद काट रहे बुजुर्ग पिता को हाईकोर्ट से राहत, सशर्त मिली जमानत!!

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कौशांबी: बेटे की हत्या के मामले में उम्रकैद काट रहे बुजुर्ग पिता को हाईकोर्ट से राहत, सशर्त मिली जमानत!!

 !!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!

दो टूक// प्रयागराज/कौशांबी जिले में बेटे की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 73 वर्षीय बुजुर्ग को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हत्या के आरोप में दोषी ठहराए गए अभियुक्त शिवनारायण सिंह की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सशर्त जमानत मंजूर कर ली है। साथ ही अदालत ने उन पर लगाए गए अर्थदंड की वसूली पर भी फिलहाल रोक लगा दी है।

मामला थाना पिपरी क्षेत्र के ग्राम फतेहपुर शहाबपुर का है। मृतक की पत्नी किरण देवी ने 10 मई 2022 को अपने ससुर शिवनारायण सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि मोबाइल फोन को लेकर हुए विवाद में शिवनारायण सिंह ने अपनी लाइसेंसी दो नली बंदूक से अपने बेटे बृजेश कुमार पटेल को गोली मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने हत्या और आयुध अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।

मामले की सुनवाई के बाद वर्ष 2024 में अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश, त्वरित न्यायालय कौशांबी ने शिवनारायण सिंह को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ अभियुक्त की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल की गई।

सुनवाई के दौरान अभियुक्त पक्ष के अधिवक्ता सुनील चौधरी ने न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा एवं न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष कई महत्वपूर्ण तर्क रखे। अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि अभियुक्त 73 वर्षीय बुजुर्ग है, जो कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित है। उन्होंने कहा कि अभियुक्त की दोनों आंखों की रोशनी लगभग जा चुकी है, जिसकी मेडिकल रिपोर्ट काल्विन हॉस्पिटल प्रयागराज से न्यायालय के आदेश पर प्रस्तुत की जा चुकी है।

बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि शिवनारायण सिंह पिछले करीब साढ़े तीन वर्षों से नैनी जेल में बंद हैं। उनके खिलाफ दर्ज 13 पुराने मुकदमे वर्ष 1970 से 1978 के बीच के हैं, जिनमें वह पहले ही दोषमुक्त हो चुके हैं। अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि अभियुक्त को केवल बहू और मृतक के नाबालिग बच्चों के बयान के आधार पर दोषी ठहराया गया, जबकि घटना का कोई स्वतंत्र प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं है।

बचाव पक्ष ने यह भी तर्क रखा कि जिस लाइसेंसी दो नली बंदूक से हत्या किए जाने का आरोप लगाया गया, उससे संबंधित आयुध अधिनियम के मुकदमे में अभियुक्त को पहले ही दोषमुक्त किया जा चुका है। इन सभी तथ्यों और मेडिकल रिपोर्ट पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने अभियुक्त को सशर्त जमानत प्रदान कर दी।

अदालत ने आदेश दिया है कि अभियुक्त प्रत्येक माह के पहले सोमवार को संबंधित पुलिस स्टेशन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगा। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने अर्थदंड की वसूली पर रोक लगाते हुए मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर 2026 निर्धारित की है। अदालत ने पेपर बुक तैयार करने के निर्देश देते हुए अपील की अंतिम सुनवाई की तारीख भी तय कर दी है।