भूजल संरक्षण की दिशा में सक्रिय भूगर्भजल विभाग, 75 जिलों में संसाधनों के आकलन से लेकर रिचार्ज योजनाओं पर तेज़ी!!
!!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!
लखनऊ, 11 मार्च 2026।
दो टूक// प्रदेश में लगातार बढ़ते भूजल संकट और जल संसाधनों के महत्व को देखते हुए उत्तर प्रदेश का भूगर्भजल विभाग भूजल सम्पदा के संरक्षण, प्रबंधन और वैज्ञानिक आकलन की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। वर्ष 2004 में राज्य सरकार ने भूगर्भ जल विभाग को प्रदेश की भूजल सम्पदा के सर्वेक्षण, अनुसंधान, नियोजन, विकास, प्रबंधन तथा भूजल दोहन के नियंत्रण और संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों के लिए नोडल एजेंसी घोषित किया था।
भूगर्भ जल विभाग के मुख्य कार्यों में प्रदेश की भूजल सम्पदा का सर्वेक्षण, उसका वैज्ञानिक आकलन, प्रबंधन एवं नियोजन के साथ-साथ भूजल दोहन पर नियंत्रण, संरक्षण और संचयन को बढ़ावा देना शामिल है। इसके अलावा विभिन्न विभागों द्वारा संचालित रिचार्ज योजनाओं का तकनीकी समन्वय और अनुश्रवण भी विभाग की प्रमुख जिम्मेदारी है।
826 विकासखंडों में भूजल स्थिति का आकलन
दिनांक 31 मार्च 2025 के आंकड़ों पर आधारित नवीनतम भूजल संसाधन आकलन के अनुसार प्रदेश के 75 जनपदों के कुल 826 विकासखंडों में से 44 विकासखंड अतिदोहित श्रेणी में हैं, जबकि 48 विकासखंड क्रिटिकल और 171 विकासखंड सेमी क्रिटिकल श्रेणी में रखे गए हैं। वहीं 563 विकासखंडों को सुरक्षित श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है।
भूजल स्तर की निगरानी के लिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में प्री-मानसून और पोस्ट-मानसून के दौरान नियमित मापन किया जाता है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 184 अक्रियाशील पीजोमीटर के स्थान पर नए पीजोमीटर स्थापित किए गए और 200 पीजोमीटर का रखरखाव एवं अनुरक्षण कार्य भी शत-प्रतिशत पूरा किया गया।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में भी विभाग ने निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप 233 अक्रियाशील पीजोमीटर के स्थान पर नए पीजोमीटर स्थापित करने का कार्य पूरा कर लिया है, साथ ही 200 पीजोमीटर के रखरखाव का कार्य भी शत-प्रतिशत पूरा किया जा चुका है।
“भूजल सप्ताह” से बढ़ाई जा रही जन-जागरूकता
भूजल संरक्षण को लेकर जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विभाग द्वारा हर वर्ष 15 से 22 जुलाई के बीच “भूजल सप्ताह” का आयोजन किया जाता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 16 से 22 जुलाई 2025 के बीच प्रदेश के सभी 75 जिलों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को भूजल संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया।
बुन्देलखण्ड में लागू इण्डिया-इजराइल वाटर प्रोजेक्ट
बुन्देलखण्ड क्षेत्र में जल संसाधन प्रबंधन को मजबूत करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार और इजराइल के जल संसाधन मंत्रालय के बीच 20 अगस्त 2020 को “प्लान ऑफ को-ऑपरेशन” पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसके तहत “इण्डिया-इजराइल बुन्देलखण्ड वाटर प्रोजेक्ट” लागू किया गया है।
इस परियोजना के तहत बुन्देलखण्ड क्षेत्र के 26 ग्रामों में हाइड्रोजियोलॉजिकल परिस्थितियों के आधार पर डिमांड साइड मैनेजमेंट और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से जल प्रबंधन के कार्य किए जा रहे हैं। उन्नत कृषि तकनीकों और इंटीग्रेटेड ड्रिप इरिगेशन प्रणाली के माध्यम से जल संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है।
इस योजना के पहले चरण में चयनित इजराइली कंपनी द्वारा फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंप दी गई है, जिसे मंजूरी मिल चुकी है। इसके अलावा झांसी जिले के बड़ागांव विकासखंड के ग्राम गंगावली में एक मिनी पायलट प्रोजेक्ट भी तैयार किया गया है, जिस पर आवश्यक अनुमोदन के बाद ई-निविदा प्रक्रिया पूरी कर अनुबंध भी कर लिया गया है।
अटल भूजल योजना के तहत भी कार्य जारी
प्रदेश में अटल भूजल योजना के अंतर्गत 88 अतिदोहित और क्रिटिकल विकासखंडों में वाटर सिक्योरिटी प्लान विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही 88 मध्यम गहरे पीजोमीटर स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें से चार पीजोमीटर की स्थापना का कार्य पूरा हो चुका है और शेष कार्य प्रगति पर है।
इसके अतिरिक्त इन विकासखंडों में रूफटॉप रेनवॉटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा देने के लिए कुल 56,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में संरचनाएं विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिस पर विभाग द्वारा तेजी से कार्यवाही की जा रही है।
भूगर्भजल विभाग का कहना है कि प्रदेश में बढ़ती जल आवश्यकता और घटते भूजल स्तर को देखते हुए संरक्षण, संचयन और वैज्ञानिक प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सके।।
