गौतमबुद्धनगर: नोएडा में परिवहन मुद्दों पर टकराव: मीटिंग में नहीं पहुंचे शिवा बजाज, 30 मार्च तक टला आंदोलन!!
!!वरिष्ठ संवाददाता देव गुर्जर!!
दो टूक// नोएडा!!
नोएडा में परिवहन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर प्रस्तावित बैठक को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। एआरटीओ प्रशासन, भारतीय किसान यूनियन (लोक शक्ति) और गौतम बुद्ध नगर ऑटो यूनियन के बीच आज शाम 4:00 बजे एक अहम बैठक निर्धारित थी, लेकिन बैठक में प्रमुख पक्ष शिवा बजाज के अनुपस्थित रहने से स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
भारतीय किसान यूनियन (लोक शक्ति) के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि शिवा बजाज का बैठक में न पहुंचना उनकी तानाशाही कार्यशैली को दर्शाता है, जिससे संगठन और परिवहन से जुड़े लोगों में भारी नाराजगी है।
इस पूरे घटनाक्रम के चलते 24 मार्च को प्रस्तावित आंदोलन को लेकर स्थिति और अधिक गरमाने लगी थी। हालांकि, एआरटीओ प्रशासन के अधिकारी नंदकुमार तथा थाना सेक्टर-24 के इंस्पेक्टर सुबोध कुमार के विशेष आग्रह पर आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।
प्रशासन की ओर से आगामी 28 मार्च को प्रस्तावित प्रधानमंत्री की रैली का हवाला देते हुए शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की गई, जिसे संगठन ने स्वीकार करते हुए आंदोलन को 30 मार्च तक स्थगित करने का निर्णय लिया है।
भारतीय किसान यूनियन (लोक शक्ति) के राष्ट्रीय महासचिव चौधरी बीसी प्रधान ने स्पष्ट कहा कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो 30 मार्च के बाद एक व्यापक और जोरदार आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि संगठन हमेशा किसानों, चालकों और आम जनमानस के अधिकारों के लिए संघर्ष करता रहा है और आगे भी किसी प्रकार की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
चौधरी बीसी प्रधान लंबे समय से किसानों और श्रमिकों के मुद्दों को मजबूती से उठाते रहे हैं और जमीनी स्तर पर उनकी सक्रियता के कारण संगठन को व्यापक समर्थन मिलता रहा है। उनके नेतृत्व में संगठन ने कई बार जनहित से जुड़े मुद्दों पर प्रशासन को झुकने के लिए मजबूर किया है।
साथ ही, ओमप्रकाश गुर्जर भी संगठन के सक्रिय और जुझारू नेता माने जाते हैं, जो लंबे समय से किसानों और ऑटो यूनियन से जुड़े लोगों की समस्याओं को मजबूती से उठाते रहे हैं। जमीनी स्तर पर उनकी मजबूत पकड़ और संघर्षशील छवि के चलते क्षेत्र में उन्हें एक प्रभावशाली जननेता के रूप में देखा जाता है।
वहीं, संगठन के अन्य पदाधिकारियों ने भी चेतावनी दी कि यदि वार्ता के माध्यम से समाधान नहीं निकला, तो आंदोलन को बड़े स्तर पर चलाया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।।
